रीतिमुक्त काव्यधारा की रचना है :
'भावविलास' के रचयिता हैं :
'संस्कृति और सभ्यता' निबन्ध के निबन्धकार हैं :
'ध्रुवस्वामिनी' के लेखक हैं :
किशोरी लाल गोस्वामी की रचना है :
'गुनाहों का देवता' रचना की विधा है :
शुक्लयुगीन लेखक हैं :
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए: (i) जल है तो कल है (ii) मेरे सपनों का भारत (iii) सड़क सुरक्षा, जीवन-रक्षा (iv) सांप्रदायिकता : एक अभिशाप (v) जीवन में कम्प्यूटर का महत्त्व
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए : (i) चन्द्रशेखरः कः आसीत् ? (ii) वीरः केन पूज्यते ? (iii) वाराणसी नगरी कस्याः नद्याः कूले स्थिता ? (iv) ज्ञानं कुत्र सम्भवति ?
अखिल भारतीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता मित्र को एक बधाई-पत्र लिखिए।
आपके विद्यालय के पुस्तकालय में हिन्दी की पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं का अभाव है। इन्हें मँगाने का अनुरोध करते हुए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए।
अपनी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत खण्ड से कण्ठस्थ एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
दिए गए कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए: (i) महाकवि सूरदास (ii) बिहारीलाल (iii) मैथिलीशरण गुप्त (iv) सुभद्रा कुमारी चौहान
दिए गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए : (i) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (ii) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (iii) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (iv) रामधारी सिंह 'दिनकर'
'कर्ण' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
'मातृ-भूमि के लिए' खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर आज़ाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'तुमुल' खण्डकाव्य का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर कैकेयी का चरित्र चित्रण कीजिए।
'जय सुभाष' खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग 'लक्ष्मी' का सारांश लिखिए।
'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर महात्मा गाँधी का चरित्र चित्रण कीजिए।
निम्नलिखित संस्कृत पद्यांश का संदर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : बन्धनं मरणं वापि जयो वापि पराजयः। उभयत्र समो वीरः वीर भावो हि वीरता।।
निम्नलिखित संस्कृत पद्यांश का संदर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : सार्थ : प्रवसतो मित्रं किंस्विन् मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य च किं मित्रं किंस्विन् मित्रं मरिष्यतः।।