दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित, हिन्दी में अनुवाद कीजिए : नितरां नीचोऽस्मीति त्वं खेदं कूप ! कदापि मा कृथाः । अत्यन्तसरस हृदयो यतः परेषां गुणग्रहीताऽसि ।।
दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित, हिन्दी में अनुवाद कीजिए : सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ।।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के 'पंचम सर्ग' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' के चरित्र की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के आधार पर जवाहरलाल नेहरू का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
'कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य के कथानक का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
'त्वाम्' शब्द में विभक्ति एवं वचन है
'पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
'नवरत्न' में समास है
'सुगम' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है
'सोरठा' छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में मात्राएँ होती हैं
"ज्यौं आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि ।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
हा ! रघुनन्दन प्रेम परीते । तुम बिन जियत बहुत दिन बीते ।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
'रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं
'सुमित्रानन्दन पन्त' की रचना नहीं है
'भारतेन्दु युग' की समयावधि है
'भारत-भारती' के रचनाकार हैं
'केशवदास' किस काल के कवि हैं ?
'तूफानों के बीच' रचना की विधा है
'चलो चाँद पर चलें' के रचनाकार हैं
'कोणार्क' के रचनाकार हैं
'महादेवी वर्मा' द्वारा रचित रेखाचित्र है