'तुमको भी संदेह हो रहा है' - यह कथन वक्ता रामनिलाल के इस संदेह को प्रकट करता है कि मनोरमा उसे इस समय क्यों बुला रही है। वह सोच में पड़ गया है कि इस बुलावे के पीछे क्या कारण हो सकता है और कहीं यह कोई भ्रम या धोखा तो नहीं।
संदेह की यह स्थिति उस समय से उत्पन्न हुई जब मनोरमा का बुलावा आया। रामनिलाल को लगता है कि यह बुलावा असामान्य है और हो सकता है कि इसमें कोई रहस्य छिपा हो। श्याम की तीखी दृष्टि और उसका रुक-रुक कर बातें करना भी इस बात का संकेत है कि श्याम को भी कुछ संदेह है। इस प्रकार दोनों मित्र एक ही संदेह से ग्रसित हैं।