सूरदास के आराध्य प्रभु का नाम श्रीकृष्ण हैं। वह कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे और उन्होंने अपनी समस्त रचनाएँ श्रीकृष्ण के प्रति समर्पित कीं।
सूरदास की रचनाएँ ब्रजभाषा में लिखी गई हैं। ब्रजभाषा उस समय की प्रचलित साहित्यिक भाषा थी और इसमें लिखे गए भक्ति काव्य ने जन-जन तक कृष्ण भक्ति का संदेश पहुँचाया।
सूरदास की दो प्रमुख पुस्तकों के नाम:
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सूरसागर: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है जिसमें श्रीकृष्ण के बाल रूप का अत्यंत मनोहारी वर्णन मिलता है। इसमें लगभग 5000 पद संकलित हैं।
सूरसारावली: यह भी उनकी महत्वपूर्ण रचना है जिसमें कृष्ण लीला का वर्णन है।
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इनके अतिरिक्त साहित्य लहरी भी उनकी प्रसिद्ध रचना है। सूरदास को हिंदी साहित्य का 'सूर्य' कहा जाता है।