Question:

इस कहानी में भेड़िया किसका प्रतीक है? बूढ़े सियार ने भेड़िए का रूप क्यों बदला?

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भेड़िया शोषक वर्ग का प्रतीक है, सियार चापलूसों का। सियार ने भेड़िए का रूप बदलकर उसे संत बनाया और चापलूसी से प्रसन्न किया।
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Solution and Explanation

इस कहानी में भेड़िया शोषक वर्ग का प्रतीक है। भेड़िया उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो शक्तिशाली हैं और दूसरों का शोषण करते हैं। वहीं सियार चापलूसों का प्रतीक है जो शक्तिशाली लोगों की चापलूसी करके अपना स्वार्थ साधते हैं। बूढ़े सियार ने भेड़िए का रूप इसलिए बदला ताकि वह उसे संत का रूप दे सके। सियार ने भेड़िए के माथे पर तिलक लगाया, गले में कंठी पहनाई और मुँह में घास के तिनके खोंस दिए। वह यह दिखाना चाहता था कि बाहरी रूप-रंग बदलने से कोई भी संत या महात्मा बन सकता है, चाहे उसका स्वभाव कैसा भी हो। सियार अपनी चापलूसी से भेड़िए को खुश करना चाहता था।
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