सियार ने भेड़िए को तीन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने को कहा था:
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बाहरी रूप-रंग का ध्यान: सियार ने भेड़िए के मस्तक पर तिलक लगाया और गले में कंठी पहनाई, यानी उसे साधु-संतों जैसा बाहरी वेश धारण करने की सलाह दी।
दिखावा और ढोंग: उसने भेड़िए के मुँह में घास के तिनके खोंसे ताकि वह अहिंसक और सज्जन प्रतीत हो। यह दिखावा करने की सलाह थी कि बाहर से भले दिखो, भले ही अंदर से कैसे भी हो।
चालाकी और चापलूसी: सियार ने भेड़िए को यह समझाया कि रूप-रंग बदलने से आदमी तक बदल जाते हैं, फिर सियार तो क्या चीज़ है। यानी दूसरों को धोखा देने के लिए चालाकी और चापलूसी का सहारा लेना चाहिए।
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