वक्ता (बाबू जी) ने इस समस्या के हल के लिए यह किया कि उन्होंने चेतन को मकान देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनके जीते जी यह संभव नहीं है। उन्होंने चेतन को यह भी समझाया कि मकान चाहे बेकार ही पड़ा रहे, लेकिन वह उसे नहीं दे सकते।
क्या वे इस समाधान में सफल हुए?
नहीं, वे इस समाधान में सफल नहीं हुए। उनका इनकार और सख्त रवैया समस्या का समाधान नहीं था, बल्कि यह समस्या को और उलझाने वाला था। उनके इस रवैये से चेतन और अधिक निराश हुआ होगा और पिता-पुत्र के बीच दूरियाँ बढ़ी होंगी। मकान देने से इनकार करके उन्होंने समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला, बल्कि उसे टाल दिया।