रामनिलाल और श्याम में गहरी मित्रता का संबंध है। वे दोनों एक-दूसरे के विश्वासपात्र हैं और अपने मन की बातें साझा करते हैं।
रामनिलाल ये बातें श्याम से इसलिए बता रहा है क्योंकि वह अपने मन में उठ रहे संदेह को लेकर व्याकुल है। वह श्याम को अपना विश्वासपात्र समझता है और उससे अपनी उलझन साझा करना चाहता है। श्याम की तीखी दृष्टि और रुक-रुक कर बातें करने से पता चलता है कि दोनों के बीच गहरा आत्मीय संबंध है, जहाँ वे बिना किसी संकोच के अपने मन की बात कह सकते हैं।