List of practice Questions

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 
हरगोबिन ने कुछ नहीं खाया। खाया नहीं गया। संवइद्या टकर खाता है और ‘अफर’ कर सोता है, किंतु हरगोबिन को नींद नहीं आ रही है।  यह उसने क्या किया? क्या कर दिया? वह किसलिए आया था? वह झूठ क्यों बोला? नहीं, नहीं सुबह उठते ही वह बूढ़ी माता को बड़ी बहुरिया का सही संवाद सुना देगा — अक्षर-अक्षर, ‘मायजी, आपकी इकलौती बेटी बहुत दुख में है। आज ही किसी को भेजकर बुलवा लीजिए। नहीं तो वह सचमुच कुछ कर बैठेगी। आखिर, किनके लिए वह इतना सहेगी! बड़ी बहुरिया ने कहा है, भाभी के बच्चों की जूठन खाकर वह एक कोने में पड़ी रहेगी...।’  रात भर हरगोबिन को नींद नहीं आई। आँखों के सामने बड़ी बहुरिया बैठी रही — सिसकती, आँसू पोंछती हुई।

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
थाना बिंधपुर स्टेशन पर गाड़ी पहुँची तो हरगोबिन का जी भारी हो गया। इसके पहले भी कई भला-बुरा संवाद लेकर वह इस गाँव में आया है, कभी ऐसा नहीं हुआ। उसके पैर गाँव की ओर बढ़ ही नहीं रहे थे। इसी पंडंडी से बड़ी बहुरिया अपने मैके लौट आयेगी। गाँव छोड़कर चली जायेगी। फिर कभी नहीं आयेगी। हरगोबिन का मन कल्पने लगा – तब गाँव में क्या रह जाएगा? गाँव की लक्ष्मी ही गाँव छोड़कर जायेगी! \ldots{} किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा? कैसे कहेगा कि बड़ी बहुरिया बझड़ा-सागा खाना गुज़ारा कर रही है? सुनने वाले हरगोबिन के गाँव का नाम लेकर थूकेंगे – कैसा गाँव है, जहाँ लक्ष्मी जैसी बहुरिया दुख भोग रही है!