मेवाड़-केसरी देखा रहा,
\(\hspace{1cm}\) केवल रण का न तमाशा था।
वह दौड़-दौड़ करता था रण,
\(\hspace{1cm}\) वह मान रक्त का प्यासा था।।
चढ़कर चेतक पर धूम धूम,
\(\hspace{1cm}\) करता सेना रखवाली था।
ले महामृत्यु को साथ-साथ,
\(\hspace{1cm}\) मानो प्रत्यक्ष कपालि था।।