Comprehension

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : अगर धीरे चलो वह तुम्हें छू लेगी दौड़ों तो छूट जाएगी नदी अगर ले लो साथ वह चलती चली जाएगी कहीं भी यहाँ तक कि कबाड़ी की दुकान तक भी । 
 

Question: 1

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

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आधुनिक कविताओं का संदर्भ लिखते समय, कवि और कविता के शीर्षक के साथ-साथ यदि काव्य-संग्रह का नाम ज्ञात हो, तो उसका उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को और भी प्रामाणिक बनाता है।
Updated On: Nov 11, 2025
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Solution and Explanation

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित आधुनिक कवि केदारनाथ सिंह द्वारा रचित 'नदी' शीर्षक कविता से उद्धृत है। यह पद्यांश उनके काव्य-संग्रह 'यहाँ से देखो' में संकलित है। इस कविता में कवि ने नदी को जीवन के विभिन्न रूपों और समय के प्रवाह के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है।
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Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।

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आधुनिक कविता की व्याख्या करते समय, उसके प्रतीकात्मक अर्थ को समझना और स्पष्ट करना बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ 'नदी' और 'कबाड़ी की दुकान' केवल भौतिक वस्तुएँ नहीं, बल्कि गहरे जीवन-दर्शन के प्रतीक हैं।
Updated On: Nov 11, 2025
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Solution and Explanation

व्याख्या: कवि केदारनाथ सिंह नदी के प्रतीकात्मक स्वरूप का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यदि तुम जीवन में हड़बड़ी और तेज गति से भागोगे तो नदी (अर्थात् जीवन की सहजता, संस्कृति और संवेदना) तुमसे बहुत पीछे छूट जाएगी। तुम उसे पकड़ नहीं पाओगे। लेकिन यदि तुम उसे अपने साथ लेकर चलोगे, अर्थात् जीवन को सहजता, धैर्य और संवेदना के साथ जिओगे, तो वह तुम्हारे साथ कहीं भी और हर परिस्थिति में चलती चली जाएगी। वह इतनी सहज और अपनी है कि तुम्हारे जीवन के सबसे साधारण और उपेक्षित क्षणों में भी, यहाँ तक कि कबाड़ी की दुकान जैसी निरर्थक जगह पर भी, वह तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगी। इसका भाव यह है कि जीवन की सच्ची अनुभूति और संस्कृति, भाग-दौड़ में नहीं, बल्कि उसे धैर्य और अपनत्व के साथ जीने में है।
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Question: 3

उपर्युक्त पद्यांश में 'नदी' किसका प्रतीक है ?

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प्रतीकात्मक अर्थ वाले प्रश्नों का उत्तर देते समय, प्रतीक के विभिन्न संभावित अर्थों को बिंदुवार (bullet points) तरीके से प्रस्तुत करना एक अच्छा तरीका है। यह आपके उत्तर को व्यापक और सुगठित बनाता है।
Updated On: Nov 11, 2025
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Solution and Explanation

उपर्युक्त पद्यांश में 'नदी' निम्नलिखित का प्रतीक है:
जीवन का सहज प्रवाह: नदी जीवन की सहजता और निरंतरता का प्रतीक है।
संस्कृति और परम्परा: वह हमारी संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं की धारा का प्रतीक है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है।
संवेदना और मानवीयता: नदी मनुष्य की कोमल भावनाओं, संवेदनाओं और मानवीयता का प्रतीक है, जो भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पीछे छूट जाती हैं।
समय: कुछ संदर्भों में इसे समय के सतत प्रवाह का प्रतीक भी माना जा सकता है।
संक्षेप में, नदी जीवन के उन सभी सहज, संवेदनशील और सांस्कृतिक तत्वों का प्रतीक है जिन्हें आधुनिक जीवन की आपाधापी में मनुष्य खोता जा रहा है।
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