List of top Questions asked in Maharashtra Class XII

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 
गद्यांश: 
एक बार इंग्लैंड के प्रसिद्ध साहित्यसेवी डॉ॰ जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस ज़ाहिर करते लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता। 
"क्यों?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा। 
"आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।" 
"पर यह बात अब की तो फिर लीजिए है।" डॉ॰ जॉनसन ने कहा। 
"और करीब आठ घंटे ऑफिस के काम करने पड़ते हैं।" 
"और बाकी आठ घंटे?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा। 
"वह तो खाने, पीने, कपड़े बदलने, नहाने-धोने, ऑफिस आने-जाने, मित्रों से मिलने-जुलने, किताबें पढ़ने तथा घरेलू कामों में व्यतीत हो जाते हैं।" 
"तब तो मुझे भी तुम्हारा मतलब समझ में आ गया," डॉ॰ जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले। 
"क्यों? क्या?" मित्र ने पूछा। 
"यदि किसी व्यक्ति का सोना, खाना, पीना, नहाना, धोना, और अपने अनुभवों के लिए दुनिया में एक जीवन ही हो पाए, तो जानिए, वह व्यक्ति चौबीस घंटे नहीं, बल्कि सत्तर या अस्सी करोड़ लोगों जैसे अपना पेट भर सकता है।" 
"क्या कहा आपने?" 
"मैंने कहा कि संसार में करोड़ों लोग हैं जो मेहनत करते हुए भी अपने जीवन में समय नहीं निकाल पाते।" 
यह सुनकर मित्र निरुत्तर रह गया। डॉ॰ जॉनसन ने कहा, "एक बार नज़र डालिए — खेतों में किसान हैं, उबल-उबल कर भोजन बनाने वाले, नदी-नालों में रेंगते लोग हैं, कारख़ानों में काम करने वाले मजदूर हैं। यही सच्चे लोग हैं, जो परिश्रम और श्रम की पूजा करते हैं। इन्हीं के श्रम से संसार चलता है। दुनिया में करोड़ों लोग हर दिन आते हैं और उन्हें श्रम मिलता ही नहीं।" 
 

परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 
गद्यांश: 
अच्छे मंच संचालक के लिए आवश्यक है - अच्छी तैयारी। वर्तमान समय में संगीत संध्या, बर्थ डे पार्टी या अन्य संध्या कार्यक्रमों के लिए मंच संचालन आवश्यक हो गया है। मैंने भी इस तरह के अनेक कार्यक्रमों में सूत्र संचालन किया है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है। मैं भी प्रायः यह देखता हूँ कि कार्यक्रम का स्वरूप क्या है — सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक, कवि सम्मेलन, मुषायरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम! फिर उसी रूप में मैं कार्यक्रम का संहिता लेखन करता हूँ। इसके लिए कड़ी साधना व सतत प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम की सफलता सूत्र संचालन के हाथ में होती है। वह दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है। इसलिए संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्वों का अध्ययन करे। सूत्र संचालक के लिए कुछ महत्वपूर्ण गुणों का होना आवश्यक है। हँसमुख, हार्दिकभावी, विविध विषयों का ज्ञाता होने के साथ-साथ उसका भाषा पर प्रभुत्व होना आवश्यक है। कभी-कभी किसी कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना रहती है। यहाँ सूत्र संचालन के भाषा प्रभुत्व की परीक्षा होती है। पूर्व निर्धारित अतिथियों का न आना, यदि आ भी जाएँ तो उनकी दिनचर्या के कार्य व्यवस्था का ध्यान रखते हुए कार्यक्रम में संशोधन/सुधार करना पड़ता है। आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना ही सूत्र संचालन की विशेषता होती है।