निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए (कोई दो):
(1) प्यारे जी मैंने राम रतन धन पायो।
(2) राधा-बदन चंद सो सुंदर।
(3) चढ़ी अनंगन नंदि अंबार।
भूड़ा उतरै कैसे पार।।
राणा ने सोचा इह पार।
तब तक पेखत झा उस पार।।
(4) एक प्राण में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पिया का, नारी नहीं रह सकती है।
Step 1: प्रश्न की व्याख्या.
यह प्रश्न अलंकारों की पहचान पर आधारित है। अलंकार का अर्थ होता है — वह गुण जो काव्य को शोभनीय, मधुर और प्रभावशाली बनाता है। प्रत्येक उदाहरण में प्रयुक्त भाव या तुलना के आधार पर अलग-अलग अलंकार उपस्थित हैं।
Step 2: प्रत्येक पंक्ति का विश्लेषण.
(1) "राम रतन धन पायो" — यहाँ राम के गुणों को धन के समान बताया गया है, अतः रूपक अलंकार है।
(2) "राधा-बदन चंद सो सुंदर" — यहाँ राधा के मुख की तुलना चंद्र से की गई है, अतः उपमा अलंकार है।
(3) "राणा ने सोचा इह पार..." — यहाँ 'पार' शब्द का दो अर्थों में प्रयोग हुआ है (नदी का किनारा और समस्या का समाधान), अतः श्लेष अलंकार है।
(4) "एक प्राण में दो तलवारें..." — यहाँ रूपक के माध्यम से यह बताया गया है कि एक मन में दो प्रेम नहीं रह सकते, अतः रूपक अलंकार है।
Step 3: निष्कर्ष.
प्रत्येक पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार कवि की कल्पनाशक्ति और भाषा की सुंदरता को उजागर करता है।
निम्नलिखितेषु कः अर्थालङ्कारः नास्ति ?
"श्लिष्टैः पदैरनेकार्थाभिधाने_____ इष्यते ।" इत्यत्र रिक्तस्थानं पूरयत ।
"कः कस्य पुरुषो बन्धुः किमाप्यं कस्य केनचित् एको हि जायते जन्तुरेकरेव विनश्यति ।" - इत्यत्र कः अलङ्कारः ?
उपमालङ्कारस्य लक्षणम् एतत् क्रमेण व्यवस्थापयत ।
(A) उपमा
(B) वाक्यैक्य
(C) साम्यम्
(D) द्वयोः
(E) वाच्यमवैधर्म्यम्
अधोलिखितेषु विकल्पेषु उचिततमम् उत्तरं चिनुत-
अलंकार ?
सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।
मनहु नीले मणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।।