“यह काम मैं अपने पैसे से करने को कह रहा हूँ, आपके पैसे से नहीं जो आप नुक्ताचीनी करें।” ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी से उद्धृत इस कथन के संदर्भ में भूषण के चरित्र की समीक्षा कीजिए।
यह कथन भूषण के स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व को दर्शाता है।
भूषण उन लोगों में से है जो दूसरों की सहायता को अनावश्यक हस्तक्षेप समझते हैं। वह मानता है कि अगर कार्य अपनी पूंजी से हो रहा है, तो किसी को उसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।
यह कथन उसकी नुकीली सोच, स्वत्वबोध और व्यक्तिगत सीमाओं को स्पष्ट करता है।
भूषण अपने आत्मसम्मान के प्रति सजग है, किन्तु कभी-कभी यह व्यवहार असंवेदनशील भी प्रतीत होता है, विशेषकर पारिवारिक संदर्भ में।
इस कथन के माध्यम से लेखक ने उस मध्यमवर्गीय मानसिकता का चित्रण किया है जिसमें व्यक्ति अपनी सीमित क्षमता में भी आत्मनिर्भरता को महत्त्व देता है।
‘बाज़ार में कभी–कभी आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ — इस कथन को उदाहरण सहित ‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?
'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत — इस विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
यशोधर बाबू की पत्नी मुख्यतः पुराने संस्कारों वाली थी, फिर किन कारणों से वह आधुनिक बन गई ? उसके इस आचरण पर यशोधर बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी ?