वन प्रदेश के चुनाव में भेड़ों ने अपना 'नेता' एक भेड़िए को चुना। भेड़ें यह समझ ही नहीं पाईं कि भेड़िया उनका स्वाभाविक शत्रु है और वह कभी भी उनके हित में काम नहीं कर सकता। भेड़िए ने चुनाव जीतने के लिए भेड़ों को झूठे वादे किए और उनके विश्वास को जीत लिया।
भेड़ों के हित में पहला कानून उन्होंने यह बनाया कि अब कोई भी भेड़िया किसी भेड़ को नहीं खाएगा। यह कानून देखने में भेड़ों के हित में लगता था, लेकिन वास्तव में यह एक धोखा था।
यह कानून भेड़ों के लिए हितकारी नहीं था, क्योंकि:
भेड़िया शाकाहारी नहीं बन सकता। वह चाहकर भी इस कानून का पालन नहीं कर सकता था।
यह कानून केवल दिखावे के लिए था, जिससे भेड़ें यह सोचकर निश्चिंत हो जाएँ कि अब उनकी रक्षा होगी।
भेड़िया नेता बनकर अब और अधिक आसानी से भेड़ों का शोषण कर सकता था।
यह कानून व्यवहारिक नहीं था और केवल भेड़ों को धोखा देने के लिए बनाया गया था।
इस प्रकार परसाई जी व्यंग्य के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि कैसे चालाक और शोषक लोग सरल और भोले लोगों को धोखा देकर अपना नेता बन जाते हैं, और उनके हित में बनाए गए कानून भी वास्तव में उनके शोषण का ही दूसरा रूप होते हैं।