गंगा, यमुना और सतलुज नदियों के संदर्भ में कवि ने कहा है कि ये नदियाँ लहर रही हैं और जगमग छटा निराली, पग-पग पर बिखर रही हैं। यानी ये नदियाँ निरंतर प्रवाहित हो रही हैं और इनके किनारों पर चारों ओर अद्भुत सुंदरता फैली हुई है।
इन नदियों का भारत की संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है:
धार्मिक महत्व: गंगा और यमुना को पवित्र नदियाँ माना जाता है। इनके तट पर अनेक तीर्थ स्थल और मंदिर स्थित हैं।
सांस्कृतिक धरोहर: इन नदियों के किनारे ही भारत की प्राचीन सभ्यता विकसित हुई। आज भी यहाँ अनेक त्योहार और मेले लगते हैं।
जीवनदायिनी: ये नदियाँ कृषि, पेयजल और उद्योगों के लिए जल प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें जीवनदायिनी कहा जाता है।
काव्य और साहित्य: इन नदियों पर अनेक कविताएँ, गीत और लोककथाएँ रची गई हैं, जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।