राजदरबार में बैठने और बोलने से पहले निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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बैठने का स्थान: कवि कहते हैं कि वहाँ नहीं बैठना चाहिए जहाँ से उठा दिया जाए। अर्थात अपनी योग्यता और पद के अनुसार उचित स्थान पर ही बैठना चाहिए। ऐसी जगह नहीं बैठना चाहिए जहाँ से अपमानित होकर उठना पड़े।
बोलने का तरीका: कवि कहते हैं कि "बोल अनवले रहिए" अर्थात बोलने में स्पष्ट और सीधा रहना चाहिए। टेढ़ी-मेढ़ी बातें नहीं करनी चाहिए।
साहस बनाए रखें: "हौसले नहीं हटाइए" अर्थात दरबार में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। डरपोक बनकर नहीं बैठना चाहिए।
पूछने पर ही बोलें: "बात पूछे से कहिए" अर्थात जब तक राजा या बड़े लोग पूछें, तभी बोलना चाहिए। बिना पूछे बोलना अशोभनीय माना जाता है।
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