कवि ने अपनी जन्मभूमि भारत को 'पुण्यभूमि' और 'स्वर्णभूमि' के नाम से पुकारा है। 'पुण्यभूमि' का अर्थ है वह भूमि जहाँ पुण्य के कार्य होते हैं और जो स्वयं पवित्र है। 'स्वर्णभूमि' का अर्थ है वह भूमि जो सोने के समान मूल्यवान और समृद्ध है।
कवि ने जन्मभूमि (भारत) को निम्नलिखित विशेष नामों से पुकारा है:
\begin{enumerate
जन्मभूमि: वह भूमि जहाँ कवि का जन्म हुआ।
मातृभूमि: वह भूमि जो माता के समान पूजनीय और प्रेम देने वाली है।
पुष्पभूमि: कवि ने भारत को पुष्पभूमि कहा है क्योंकि यहाँ की धरती फूलों के समान सुंदरता बिखेरती है। यहाँ सुंदरता और सुगंध चारों ओर फैली है।
स्वर्णभूमि: कवि ने भारत को स्वर्णभूमि इसलिए कहा क्योंकि यह भूमि सोने के समान बहुमूल्य है। यह समृद्धि और धन-धान्य से भरपूर है।
पुण्यभूमि: यह वह भूमि है जहाँ पुण्य के कार्य होते हैं, जहाँ ऋषि-मुनियों ने तपस्या की और जहाँ धर्म का पालन होता है।
\end{enumerate
इन नामों के माध्यम से कवि ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया है। वह अपनी मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम और गर्व व्यक्त करते हैं।