गद्यांश:
युद्धभूमि में सैनिकों का उत्साह और जोश बनाए रखने के लिए प्राचीन समय में संगीत का विशेष महत्व था। रणभूमि में नगाड़े, शंख और रणभेरी की ध्वनि गूंज उठती थी, जिससे सैनिकों के हृदय में जोश और उत्साह भर जाता था। इन स्वरों की लहरियाँ सैनिकों को यह संदेश देती थीं कि उनका धर्म देश की रक्षा करना है। संगीत की इन मधुर लहरियों से सैनिकों में साहस और वीरता की भावना जाग उठती थी। वे निडर होकर शत्रु का सामना करते थे और अपने देश के लिए बलिदान देने को तत्पर रहते थे। हमारे देश के सैनिकों ने अपने साहस और वीरता से दुश्मनों को यह एहसास दिला दिया कि "जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।"