(i) महाकवि सूरदास — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
सूरदास का जन्म 1478 ई. के आसपास दिल्ली–आगरा क्षेत्र में हुआ माना जाता है। वे जन्म से नेत्रहीन थे किंतु अद्वितीय काव्य–प्रतिभा के धनी थे।
व्यक्तित्व और योगदान:
सूरदास भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे। वे कृष्ण–भक्ति के महान गायक माने जाते हैं। उन्होंने ब्रज भाषा को काव्य–भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया।
साहित्यिक योगदान:
उनकी रचनाओं में भक्ति, प्रेम और कृष्ण–लीलाओं का अत्यंत मार्मिक वर्णन मिलता है।
प्रमुख रचना:
"सूरसागर" उनकी प्रसिद्ध रचना है जिसमें श्रीकृष्ण के बाल–लीला और रास–लीला का भावपूर्ण चित्रण है।
निष्कर्ष:
सूरदास भक्तिकाल के अमर गायक और भक्ति–काव्य के शिरोमणि कवि थे।
(ii) महादेवी वर्मा — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे छायावाद की चार प्रमुख स्तंभ कवयित्रियों में से एक थीं। उन्हें "आधुनिक मीरा" भी कहा जाता है। उनका जीवन त्याग, सेवा और साहित्य–साधना से भरा था।
साहित्यिक योगदान:
उनकी कविताओं में करुणा, वेदना और संवेदना का गहन चित्रण है। उन्होंने गद्य और संस्मरण साहित्य में भी योगदान दिया।
प्रमुख रचना:
"यामा" उनकी सर्वश्रेष्ठ काव्य–कृति है, जिसके लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
निष्कर्ष:
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की 'साहित्य–साधिका' और संवेदनशील कवयित्री थीं।
(iii) सुमित्रानन्दन पन्त — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म 20 मई 1900 को कौसानी (उत्तराखंड) में हुआ। उनकी शिक्षा काशी और इलाहाबाद में हुई।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे छायावाद के प्रमुख कवि थे। उनका स्वभाव कोमल और सौन्दर्य–प्रिय था। वे प्रकृति, मानवता और सौन्दर्य के कवि माने जाते हैं।
साहित्यिक योगदान:
उनकी रचनाओं में प्रकृति–चित्रण और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय मिलता है।
प्रमुख रचना:
"पल्लव" उनका प्रसिद्ध काव्य–संग्रह है जिसमें प्रकृति और प्रेम का कोमल चित्रण है।
निष्कर्ष:
वे छायावाद युग के प्रकृति–प्रेमी और सौन्दर्य–बोध के महान कवि थे।