(i) महाकवि सूरदास — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और जीवन:
सूरदास का जन्म 1478 ई. में दिल्ली–आगरा मार्ग पर सीही गाँव में हुआ माना जाता है। वे जन्मांध थे और संगीत एवं भक्ति के माध्यम से जीवन जीते रहे। वे महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे।
व्यक्तित्व और योगदान:
सूरदास कृष्णभक्ति शाखा के महान कवि थे। उनके काव्य में वात्सल्य और श्रृंगार रस की प्रधानता है। उन्होंने अपनी रचनाओं से भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी।
प्रमुख रचना:
"सूरसागर" उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है। इसमें श्रीकृष्ण के बाल–लीला से लेकर रास–लीला तक का अद्भुत चित्रण है।
निष्कर्ष:
सूरदास हिंदी साहित्य के आकाश के सूर्य हैं, जिन्होंने भक्ति–रस को लोक–लोक तक पहुँचाया।
(ii) बिहारीलाल — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और जीवन:
बिहारीलाल का जन्म 1595 ई. में ग्वालियर के निकट बसुआ नामक गाँव में हुआ। वे जयपुर और मथुरा के दरबार से भी जुड़े।
व्यक्तित्व और योगदान:
बिहारीलाल नीति और श्रृंगार के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उन्होंने अल्प शब्दों में गूढ़ भाव व्यक्त करने की अनोखी क्षमता दिखाई।
प्रमुख रचना:
"बिहारी सतसई" उनकी अमर कृति है। इसमें 700 से अधिक दोहों के माध्यम से नीति, प्रेम और श्रृंगार का सुंदर चित्रण है।
निष्कर्ष:
बिहारीलाल संक्षिप्त किन्तु गहन काव्य के आदर्श कवि हैं।
(iii) महादेवी वर्मा — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और जीवन:
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और वहाँ प्रधानाचार्य भी रहीं।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे छायावाद की चौथी स्तंभ कवयित्री थीं। उनके काव्य में करुणा, विरह और आध्यात्मिक वेदना का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने नारी–जागरण और समाज सुधार में भी योगदान दिया।
प्रमुख रचना:
"यामा" उनकी प्रमुख कृति है, जिसके लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। इसके अतिरिक्त "नीरजा", "दीपशिखा" और "संध्या गीत" भी प्रसिद्ध हैं।
निष्कर्ष:
महादेवी वर्मा को "आधुनिक मीरा" कहा जाता है।
(iv) श्यामनारायण पाण्डेय — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और जीवन:
श्यामनारायण पाण्डेय का जन्म 1907 ई. में मध्यप्रदेश में हुआ। वे बाल्यकाल से ही साहित्य और राष्ट्रभक्ति की ओर प्रवृत्त थे।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे खंडकाव्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनके काव्य में देशप्रेम, बलिदान और ऐतिहासिक घटनाओं का चित्रण मिलता है।
प्रमुख रचना:
"जौहर" उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है। इसमें चित्तौड़ की वीरांगनाओं के जौहर का वर्णन है।
निष्कर्ष:
श्यामनारायण पाण्डेय राष्ट्रभक्ति और ऐतिहासिक चेतना के कवि थे।