Question:

‘बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से जैसे धुल गई हो’ — ‘उषा’ कविता से उद्धृत इस पंक्ति में किस सिल के और कौन-से केसर से धुलने की बात कही गई है? स्पष्ट कीजिए।

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प्रतीकात्मक पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट करने के लिए प्रतीकों का अर्थ + दृश्य बिंब दोनों बताना ज़रूरी है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

यह पंक्ति महादेवी वर्मा की कविता ‘उषा’ से ली गई है, जो सौंदर्य और प्रकृति के माध्यम से भावों की कोमलता को दर्शाती है। इसमें ‘काली सिल’ प्रतीक है अंधकार, रात या निराशा का।
‘लाल केसर’ प्रतीक है — सूर्य की प्रथम रश्मियों का, जो उषा काल में क्षितिज पर फैलती हैं।
जब सूर्य की लालिमा सुबह के समय आकाश में फैलती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो काली सिल पर हल्का लाल रंग मलकर उसे धो दिया गया हो। यह अत्यंत सुंदर बिंब है — जो कविता की सौंदर्यबोध क्षमता को दर्शाता है।
इस प्रकार, "काली सिल" = रात्रि और "लाल केसर" = प्रातःकालीन रश्मियाँ; और इस दृश्य में रात का अंधकार धीरे-धीरे प्रातः की लालिमा में विलीन हो रहा है।
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