Question:

‘उषा’ कविता में प्रातःकालीन आकाश में होने वाले सूर्योदय का गतिशील चित्रण हुआ है – पुष्टि कीजिए। 
 

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प्राकृतिक दृश्य-चित्रण पर आधारित प्रश्नों में ‘गति’, ‘परिवर्तन’, और ‘सजीवता’ को मुख्य बिंदु बनाकर उत्तर दें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘उषा’ कविता में कवि ने प्रातःकालीन आकाश का अत्यंत सुंदर और जीवंत चित्रण किया है। कविता में सूर्य का उदय एक धीरे-धीरे प्रकट होती चेतना, ऊर्जा और गति के रूप में दिखाया गया है।
रात की शांति को चीरकर उषा की किरणें धीरे-धीरे आकाश को रंगने लगती हैं, जैसे कोई चित्रकार कैनवास पर रंग भर रहा हो। पक्षियों का कलरव, पेड़ों की हरियाली, और आकाश के बदलते रंग — ये सब कविता में गतिशीलता और सजीवता को दर्शाते हैं।
कवि ने न सिर्फ दृश्य को दर्शाया है, बल्कि उस अनुभव की गति, संवेदना और परिवर्तनशीलता को भी शब्दों में बाँधा है। यही कविता की विशेषता है कि यह एक दृश्य को ठहराकर नहीं, बल्कि विकासमान प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है।
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