Question:

‘‘तुलसीदास स्वभाव से सीधे-सरल थे, किंतु हृदय से स्वाभिमानी और भक्ति से ओत-प्रोत थे।’’ ‘कवितावली’ के उक्त कथन के संदर्भ में अपने विचार लिखिए। 
 

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तुलसी जैसे संत कवियों के उत्तर में भाव, विचार और जीवन-दृष्टि तीनों को समाहित करना चाहिए।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘कवितावली’ तुलसीदास के जीवन-दर्शन और व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने वाली महत्त्वपूर्ण कृति है। इसमें तुलसी का रूप एक ऐसे संत कवि का दिखता है जो सरलता और विनम्रता का प्रतीक होते हुए भी अपने आत्मसम्मान और भक्ति भावना में दृढ़ हैं।
उक्त कथन में ‘सीधे-सरल’ होने से तात्पर्य है — तुलसीदास का आमजन के प्रति सहज व्यवहार और भाषा की सरलता। वहीं, ‘स्वाभिमानी’ होने से आशय है — वह आत्मबल, जो उन्हें सत्ता या समाज से प्रभावित नहीं होने देता। वे भक्ति के मार्ग पर अडिग रहते हैं, और अपनी बात निर्भीकता से कहते हैं।
‘भक्ति से ओत-प्रोत’ होना तुलसी के पूरे काव्य की आत्मा है। ‘कवितावली’ में उनकी रामभक्ति, दीनों के प्रति संवेदना, और धर्म के लिए कटिबद्धता सर्वत्र दिखाई देती है। यह भक्ति उन्हें केवल भक्त नहीं, एक निर्भीक संत कवि बनाती है।
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