Question:

‘सिंधु घाटी सभ्यता में कला या सुरुचि का महत्व था।’ ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर उदाहरण सहित इस कथन की पुष्टि कीजिए।

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इतिहास से जुड़े उत्तरों में तथ्यों के साथ उदाहरण जोड़कर उत्तर को प्रमाणिक बनाना आवश्यक होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता के उत्खननों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि वह केवल एक व्यावसायिक या नगरीय सभ्यता नहीं थी, बल्कि उसमें सुरुचि, कला और सौंदर्य का भी गहरा भाव था।
मूर्ति-कला, सील मुहरें, मिट्टी के बर्तन, नृत्य करती लड़की की कांस्य प्रतिमा — ये सभी इस बात का प्रमाण हैं कि उस समय के लोग सौंदर्यबोध रखते थे और उन्होंने केवल उपयोगी वस्तुएँ नहीं बनाई, बल्कि उन्हें सजावटी और कलात्मक स्वरूप भी दिया।
इतना ही नहीं, नालियों की सुव्यवस्था, ईंटों के सटीक माप, शहर की योजना — यह सब इस बात की पुष्टि करते हैं कि लोग सुव्यवस्थित, सुंदर और सामाजिक दृष्टि से उत्तरदायी जीवन जीते थे।
इसलिए, यह कहना उपयुक्त है कि सिंधु घाटी की सभ्यता केवल आर्थिक या राजनीतिक नहीं थी, उसमें कला, सुंदरता और सुरुचि का भी समान स्थान था।
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