Question:

प्रेम अनुभूति का वर्णन करना नायिका के लिए कठिन क्यों है? विद्यापति रचित ‘पद’ के आधार पर लिखिए। 
 

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जब प्रेम आत्मा से उपजता है, तब उसे शब्दों में बाँधना कठिन होता है — यही विद्यापति की काव्य-विशिष्टता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

विद्यापति के पदों में राधा-कृष्ण के प्रेम की अत्यंत सूक्ष्म, कोमल और आत्मिक व्यंजना होती है। विशेषतः नायिका (राधा) की प्रेम अनुभूति को शब्द देना स्वयं राधा के लिए कठिन होता है — क्योंकि प्रेम एक ऐसा भाव है जो अनुभूत तो किया जा सकता है, परंतु व्यक्त करना लगभग असंभव है।
(1) विद्यापति के पदों में राधा की स्थिति अत्यंत मानवीय, सजीव और अंतरंग होती है।
(2) नायिका अपने हृदय की अवस्था बताने में संकोच करती है — क्योंकि उसका प्रेम सांसारिक नहीं, आत्मिक और परम प्रेम है।
(3) वह जानती है कि उसका भाव ‘अनिर्वचनीय’ है — न तो वह खुलकर बता सकती है, न ही छुपा सकती है।
(4) प्रेम में आत्मविस्मृति, रोमांच, वेदना और संकोच सब एक साथ समाहित होते हैं — जिसे व्यक्त करना उसके लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
(5) विद्यापति यह भी दर्शाते हैं कि राधा के अंतर्मन में जो कंपन है, वह केवल शारीरिक आकर्षण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मिलन की प्यास है।
निष्कर्ष: प्रेम की गहराई को मापा नहीं जा सकता, इसलिए उसे कहना भी कठिन होता है। विद्यापति के पद नायिका की इसी अभिव्यक्ति की उलझन को दर्शाते हैं — प्रेम को चुपचाप जीना ही अधिक प्रामाणिक है।
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