Comprehension

निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :

जननी निरखति बान धनुहियाँ ।
बार बार उर नैननि लावति प्रभुजू की ललित पनहियाँ ।।
कबहुँ प्रथम ज्यों जाइ जगावति कहि प्रिय बचन सवारे ।
“उठहु तात ! बलि मातु बदन पर, अनुज सखा सब द्वारे” ।।
कबहुँ कहति यों “बड़ी बार भइ जाहु भूप पहँ, भैया ।
बंधु बोलि जेंइय जो भावै गई निछावरि मैया”
कबहुँ समुझि वनगमन राम को रहि चकि चित्रलिखी सी ।
तुलसीदास वह समय कहे तें लागति प्रीति सिखी सी ।।
 

Question: 1

प्रस्तुत पद का केन्द्रीय भाव है :

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केंद्रीय भाव से संबंधित प्रश्नों में पात्र की मनःस्थिति, भावना और काव्य की सूक्ष्मता को पहचानना ज़रूरी होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
  • राम-वनगमन के बाद माँ कौशल्या की विरह वेदना
  • राम-वनगमन के पश्चात सूना राजमहल
  • राजा दशरथ का पुत्र-शोक
  • राम की बाल-लीला का वर्णन
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

इस पद्यांश में तुलसीदास ने माता कौशल्या की उस मानसिक स्थिति का मार्मिक चित्रण किया है जब भगवान राम वन गमन कर चुके हैं।
कौशल्या का हृदय पुत्र-वियोग की वेदना से भर उठा है। वह कभी राम के धनुष-बाण को निहारती हैं, तो कभी उनकी पनहियों को।
वह राम की मीठी वाणी, सुबह जगाने का ढंग, और उनका बाल्यकाल याद करती हैं — जैसे पूरा जीवन उन्हीं स्मृतियों में ठहर गया हो।
कभी वह राम से भेंट के बहाने उनके पास भेजने को कहती हैं, तो कभी बस चित्र की भांति उन्हें याद करती रहती हैं।
यह पद एक माँ के भावनात्मक संसार का जीवंत चित्रण है, जिसमें पुत्र के वियोग में हर वस्तु राम की स्मृति दिलाती है।
निष्कर्षतः, यह पद्यांश केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक माँ की अंतःकरण से湧ती हुई वेदना है — राम-वनगमन के बाद कौशल्या के विरह की पीड़ा का सजीव चित्रण।
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Question: 2

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए :
कथन: जननी बार-बार अपने पुत्र के धनुष-बाण को देख रही है ।
कारण: माता का संतान की वस्तुओं से स्वाभाविक लगाव होता है ।

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"कथन और कारण" वाले प्रश्नों में यह ध्यान रखें कि कारण केवल सत्य होना पर्याप्त नहीं, वह कथन की सटीक व्याख्या भी करता हो।
Updated On: Jan 14, 2026
  • कथन सही है, किंतु कारण गलत है ।
  • कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
  • कथन सही है और कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है ।
  • कथन सही है, किंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है ।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

इस काव्यांश में माता कौशल्या बार-बार राम के धनुष-बाण को देख रही हैं, यह कथन पूर्णतः सत्य है। यह उनके हृदय की पीड़ा और स्मृति का प्रतीक है।
किन्तु इसका कारण केवल संतान की वस्तुओं से "सामान्य" स्वाभाविक लगाव नहीं है। यहाँ यह लगाव अत्यंत गहन "विरह-भावना" और पुत्र के वियोग से उत्पन्न मानसिक चंचलता का परिणाम है।
कौशल्या पुत्र-वियोग से अत्यंत दुखी हैं, और राम की हर वस्तु उनके लिए राम की स्मृति का स्रोत बन गई है।
इसलिए, कारण में दी गई सामान्य व्याख्या — "माता का संतान की वस्तुओं से स्वाभाविक लगाव" — इस विशेष मानसिक अवस्था को नहीं दर्शाती।
निष्कर्षतः, कथन सत्य है, परन्तु कारण उस कथन की गहराई को स्पष्ट करने में असमर्थ है। अतः विकल्प (D) उपयुक्त है।
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Question: 3

राम की अनुपस्थिति में माता कौशल्या कौन-कौन से कार्य करती हैं ?
I. राम के बचपन की छोटी-छोटी जूतियों को देखती हैं ।
II. सुबह-सुबह उन्हें प्यार और मनुहार से जगाने उनके शयनकक्ष में चली जाती हैं ।
III. राम के धनुष-बाण को प्रेम से निहारती हैं ।

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ऐसे प्रश्नों में काव्यांश के विशेष क्रियात्मक विवरणों (actions) पर ध्यान दें — केवल भावनात्मक नहीं, यथार्थ घटनाओं को पहचानें।
Updated On: Jan 14, 2026
  • I, II और III तीनों
  • केवल I और II दोनों
  • केवल II और III दोनों
  • केवल I और III दोनों
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

काव्यांश के अनुसार, माता कौशल्या राम के वियोग में अत्यंत दुखी हैं और कई बार उनके क्रियाकलापों में मानसिक विचलन और स्नेह भाव स्पष्ट होते हैं।
वह राम के धनुष-बाण को बार-बार देखती हैं — यह बात स्पष्ट रूप से काव्यांश में कही गई है।
साथ ही, वह राम के न होने पर भी प्रातःकाल उनके शयनकक्ष में उन्हें जगाने जाती हैं — यह व्यवहार उनके मन के खालीपन और आदत में बसे पुत्र-स्नेह को दर्शाता है।
किन्तु राम की बचपन की जूतियों को देखने की कोई स्पष्ट या संकेतात्मक उल्लेख काव्यांश में नहीं मिलता। अतः कथन I को हम सही नहीं मान सकते।
इसलिए केवल कथन II और III सही हैं।
निष्कर्षतः, विकल्प (C) उपयुक्त उत्तर है।
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Question: 4

तुलसीदास जी ने कौशल्या को मोरनी की उपमा क्यों दी है ?

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जब प्रश्न किसी उपमा या अलंकार पर आधारित हो, तो पात्र की मानसिक दशा और उपमेय की प्रकृति — दोनों के भाव-साम्य पर ध्यान दें।
Updated On: Jan 14, 2026
  • बेसुध होकर किसी भी कार्य को करने की क्षमता के कारण
  • उल्लास और प्रसन्नता के चरम उत्कर्ष में अचानक दुख का स्मरण हो आना
  • मातृवत्सल स्वभाव और वियोगजन्य दुख की समानता के कारण
  • नृत्य कौशल एवं राजसी प्रवृत्तियों की समानता के कारण
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

तुलसीदास जी ने माता कौशल्या की मानसिक स्थिति को अत्यंत मार्मिक रूप में व्यक्त करने के लिए उन्हें "मोरनी" की उपमा दी है।
मोरनी को विशेषतः इसलिये चुना गया है क्योंकि वह वर्षा के आगमन पर नृत्य करती है — यह उल्लास का प्रतीक होता है। लेकिन इसी उल्लास में वह अचानक कुछ ऐसा स्मरण कर बैठती है जिससे वह करुण क्रंदन करती है।
उसी प्रकार कौशल्या जी भी राम की स्मृतियों में कभी सुखद लम्हों को याद कर मुस्कुराती हैं, तो अगले ही क्षण पुत्र-वियोग की वेदना से भर उठती हैं।
यह भाव-परिवर्तन — प्रसन्नता से दुःख की ओर एकाएक गिरना — ही तुलसीदास जी की उपमा का मर्म है।
इसलिए विकल्प (B) ही उपयुक्त व्याख्या प्रदान करता है।
निष्कर्षतः, तुलसीदास जी ने कौशल्या के भावात्मक उतार-चढ़ाव को अभिव्यक्त करने हेतु मोरनी की उपमा दी है।
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Question: 5

राम को सखाओं और पिता के पास जाने के लिए पुकारती माता को जब उनके वहाँ नहीं होने का अहसास होता है तब वे :

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जब प्रश्न किसी पात्र की मनोस्थिति पर हो, तो उसकी भावनात्मक गहराई और क्रिया-प्रतिक्रिया के अंतर को समझना आवश्यक होता है। स्थिरता भी कभी-कभी गहन दुःख की अभिव्यक्ति होती है।
Updated On: Jan 14, 2026
  • मोरनी के समान स्तब्ध होकर नाचने लगती हैं ।
  • सभी सखी-सहेलियों को अपने शोक का हाल सुनाती हैं ।
  • राम की वस्तुओं को सीने से लगा रो पड़ती हैं ।
  • चित्र के समान स्थिर और अवाक् खड़ी रह जाती हैं ।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

यह प्रसंग उस समय का है जब माता कौशल्या राम को पुकारती हैं — कभी पिता के पास, कभी सखाओं के पास — लेकिन बार-बार उन्हें निराशा मिलती है क्योंकि राम वन चले गए हैं।
इस कठोर सत्य का सामना करते हुए उनकी मानसिक स्थिति जड़वत हो जाती है।
वे इस वेदना में ऐसी गुम हो जाती हैं कि बोलने या रोने की शक्ति भी क्षीण हो जाती है। उनकी अवस्था "चित्रवत्" हो जाती है — जैसे कोई जीवित मूर्ति, जो न बोलती है, न चलती है, न प्रतिक्रिया देती है।
यहाँ तुलसीदास जी ने मातृवेदना की चरम सीमा को दर्शाते हुए कहा है कि वह न तो चीखती हैं, न विलाप करती हैं, बल्कि वियोग की तीव्रता से वह "अवाक् और निश्चल" हो जाती हैं।
इसलिए विकल्प (D) ही सही उत्तर है, क्योंकि वह इस स्थिर और स्तब्ध मानसिक स्थिति का यथार्थ चित्रण करता है।
निष्कर्षतः, गहन दुःख की चरम स्थिति में जब क्रंदन भी असंभव हो जाए, तब व्यक्ति 'चित्रवत्' हो जाता है — यही कौशल्या की मनोदशा है।
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