Question:

पितृसत्तात्मक प्रधान समाज में भक्तिन ने अपनी बेटियों के हक की लड़ाई किस प्रकार लड़ी और उसका क्या परिणाम निकला ?

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प्रश्नों में “किस प्रकार” और “क्या परिणाम” जैसे संकेतक शब्दों पर ध्यान दें — उत्तर में क्रमशः प्रक्रिया और निष्कर्ष दोनों स्पष्ट करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

भक्तिन का संघर्ष उस पितृसत्तात्मक समाज के विरुद्ध था जहाँ बेटियों को संपत्ति और अधिकार से वंचित रखा जाता था। समाज की रूढ़ मान्यताओं और परंपराओं को चुनौती देते हुए भक्तिन ने अपनी बेटियों को उनका हक दिलाने की दिशा में साहसी कदम उठाए।
उसने न केवल सामाजिक आलोचना और विरोध को सहा, बल्कि कानून की सहायता लेकर अपने अधिकारों के लिए भी आवाज़ उठाई। उसका यह प्रयास दर्शाता है कि एक स्त्री भी समाज की बुनियादी कुरीतियों को बदलने का सामर्थ्य रखती है। भक्तिन ने साबित कर दिया कि यदि नारी दृढ़ निश्चयी हो तो वह पारंपरिक जंजीरों को तोड़ सकती है।
इस संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि बेटियाँ अपने अधिकारों की अधिकारी बनीं और समाज में एक नई सोच की शुरुआत हुई — कि बेटियाँ भी उत्तराधिकारी बन सकती हैं। भक्तिन की इस लड़ाई ने कई महिलाओं को साहस और प्रेरणा दी।
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