Question:

‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि प्राचीन लोक कलाएँ क्यों लुप्त हो रही हैं ? इन्हें पुनर्जीवित रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं ? 
 

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लोक कलाएँ केवल मनोरंजन नहीं, सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं — इन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘पहलवान की ढोलक’ पाठ यह स्पष्ट करता है कि आज के बदलते समाज में पारंपरिक लोक कलाएँ — जैसे ढोलक बजाना, लोकगीत गाना, नाच आदि — धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। इसका कारण है आधुनिकता का प्रभाव, तकनीकी मनोरंजन के साधनों का विस्तार और लोक कलाकारों को पर्याप्त सम्मान तथा मंच न मिल पाना।
युवा पीढ़ी इन कलाओं से जुड़ नहीं पा रही है क्योंकि इनसे आजीविका की संभावना कम है। इसके साथ ही समाज में इन कलाओं को ‘पुराना’ या ‘गंवई’ मानकर नज़रअंदाज़ किया जाता है।
इन कलाओं को पुनर्जीवित रखने के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में इनका शिक्षण, लोक कलाकारों को प्रोत्साहन, मंच, सरकारी सहायता, और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से प्रचार किया जा सकता है।
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