List of practice Questions

गद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टाः 

कृतीः कुरुत। 

तदा पृथुभूपेन तदर्थं धनुः सज्जीकृतम्। तदा भूमिः स्त्रीरूपं धृत्वा तस्य पुरतः प्रकटिता अभवत् अवदत् च, "हे राजेन्द्र ! तव पिता दुःशासकः वेनराजः राजधर्मस्य पालनं नाकरोत्। तदा मया चोरलुण्ठकभयात् धनधान्यपुष्पफलानि मम उदरे निहितानि। त्वं तु प्रजाहितदक्षः नृपः। यदि त्वं प्रयत्नेन कृषिकार्यं करोषि तर्हि अहं प्रसन्ना भविष्यामि। अतः धनुः त्यज। खनित्राणि, हलान्, कुद्दालकान् लवित्राणि च हस्ते गृहीत्वा प्रजाजनैः सह कृषिकार्यं कुरु।" भूमातुः उपदेशं मनसि निधाय पृथुवैन्यः नदीनां मार्गम् अवरुध्य कृषिकार्यार्थ जलस्य उपयोगम् अकरोत्। वृष्टिजलसञ्चयं कृत्वा जलव्यवस्थापनम् अकरोत्। भूमिम् उर्वरतमां कर्तुं प्रायतत। तदनन्तरं तस्मिन् क्षेत्रे जनाः धान्यबीजानि अवपन्। स नैकेभ्यः वृक्षेभ्यः विविधप्रकारकाणां बीजानां सङ्कलनं चयनं च परिश्रमेण अकरोत्। अनन्तरं बीजानां संस्करणं कृत्वा वपनम् अकरोत्। पर्जन्यानन्तरं बीजेभ्यः अङ्कुराः उद्भूताः।

उक्त गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर चुनें। 
रात्रौ दशवादने सर्कसक्रीडायाः प्रारम्भः जातः। द्वादशवादने क्रीडायाः चरमबिन्दुः समायातः। सहभोजनम्। प्रेक्षकाणाम् उत्कण्ठायाः पराकाष्ठा जाता। सेवकः मध्ये त्रीणि आसनानि स्थापितवान्, मध्यभागे च वर्तुलाकारं पीठम्। अहम् एकस्मिन् आसने उपाविशम्। अङ्गरान्ते भल्लुकवेषधारी अब्दुलः तत्र प्राप्तः। गङ्गी अपि मञ्चं समागता। ततः अस्माकं पुरतः खाद्यस्य योजना कृता।
सहभोजने आरम्भे जाते, उत्तेजितः प्रेक्षकः आनन्देन तालिकावादनम् आरब्धवान्। पूर्वमपि व्याघ्रभल्लुकौ मानुषी एवं, तथापि सा धेनुः ताभ्यां सह कार्यक्रमं कर्तुं अभ्यस्ता आसीत्। अचिरात् एव, न इयं परिचिता — व्याघ्रभल्लुकौ इति धेन्वा लक्षितम्। सम्भ्रमेण संशयेन च एकैकशः आर्यां दृष्टवती। यदा च तस्याः प्रत्ययः जातः, तदा क्षुब्धं उद्यमं — न आक्रमणम्।
अहमपि गर्जनं कृत्वा तीक्ष्णदन्तान् दंशितवान्। किन्तु न किञ्चिदपि भयम् तस्याः। अब्दुलः तं हस्तेन ताडितवान्। तेन शुब्धा सा तम् अनवधातवान्। भल्लुकः तदा चापेन पटमण्डपम् आरुहवान्। इयं कृता क्रीडा, सा धेनुः अधुना व्याघ्रं माम् लक्ष्यं कृतवती। भीत्या अहम् चतुष्पादविविष्टं व्याघ्रत्वं विस्मृत्य द्विपादं मूलस्वरूपम् आश्रितवान्।
 

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 
गद्यांश: 
एक बार इंग्लैंड के प्रसिद्ध साहित्यसेवी डॉ॰ जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस ज़ाहिर करते लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता। 
"क्यों?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा। 
"आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।" 
"पर यह बात अब की तो फिर लीजिए है।" डॉ॰ जॉनसन ने कहा। 
"और करीब आठ घंटे ऑफिस के काम करने पड़ते हैं।" 
"और बाकी आठ घंटे?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा। 
"वह तो खाने, पीने, कपड़े बदलने, नहाने-धोने, ऑफिस आने-जाने, मित्रों से मिलने-जुलने, किताबें पढ़ने तथा घरेलू कामों में व्यतीत हो जाते हैं।" 
"तब तो मुझे भी तुम्हारा मतलब समझ में आ गया," डॉ॰ जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले। 
"क्यों? क्या?" मित्र ने पूछा। 
"यदि किसी व्यक्ति का सोना, खाना, पीना, नहाना, धोना, और अपने अनुभवों के लिए दुनिया में एक जीवन ही हो पाए, तो जानिए, वह व्यक्ति चौबीस घंटे नहीं, बल्कि सत्तर या अस्सी करोड़ लोगों जैसे अपना पेट भर सकता है।" 
"क्या कहा आपने?" 
"मैंने कहा कि संसार में करोड़ों लोग हैं जो मेहनत करते हुए भी अपने जीवन में समय नहीं निकाल पाते।" 
यह सुनकर मित्र निरुत्तर रह गया। डॉ॰ जॉनसन ने कहा, "एक बार नज़र डालिए — खेतों में किसान हैं, उबल-उबल कर भोजन बनाने वाले, नदी-नालों में रेंगते लोग हैं, कारख़ानों में काम करने वाले मजदूर हैं। यही सच्चे लोग हैं, जो परिश्रम और श्रम की पूजा करते हैं। इन्हीं के श्रम से संसार चलता है। दुनिया में करोड़ों लोग हर दिन आते हैं और उन्हें श्रम मिलता ही नहीं।" 
 

परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 
गद्यांश: 
अच्छे मंच संचालक के लिए आवश्यक है - अच्छी तैयारी। वर्तमान समय में संगीत संध्या, बर्थ डे पार्टी या अन्य संध्या कार्यक्रमों के लिए मंच संचालन आवश्यक हो गया है। मैंने भी इस तरह के अनेक कार्यक्रमों में सूत्र संचालन किया है। जिस तरह का कार्यक्रम हो, तैयारी भी उसी के अनुसार करनी होती है। मैं भी प्रायः यह देखता हूँ कि कार्यक्रम का स्वरूप क्या है — सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक, कवि सम्मेलन, मुषायरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम! फिर उसी रूप में मैं कार्यक्रम का संहिता लेखन करता हूँ। इसके लिए कड़ी साधना व सतत प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम की सफलता सूत्र संचालन के हाथ में होती है। वह दो व्यक्तियों, दो घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने का काम करता है। इसलिए संचालक को चाहिए कि वह संचालन के लिए आवश्यक तत्वों का अध्ययन करे। सूत्र संचालक के लिए कुछ महत्वपूर्ण गुणों का होना आवश्यक है। हँसमुख, हार्दिकभावी, विविध विषयों का ज्ञाता होने के साथ-साथ उसका भाषा पर प्रभुत्व होना आवश्यक है। कभी-कभी किसी कार्यक्रम में ऐन वक्त पर परिवर्तन होने की संभावना रहती है। यहाँ सूत्र संचालन के भाषा प्रभुत्व की परीक्षा होती है। पूर्व निर्धारित अतिथियों का न आना, यदि आ भी जाएँ तो उनकी दिनचर्या के कार्य व्यवस्था का ध्यान रखते हुए कार्यक्रम में संशोधन/सुधार करना पड़ता है। आयोजकों की ओर से अचानक मिली सूचना के अनुसार संहिता में परिवर्तन कर संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाना ही सूत्र संचालन की विशेषता होती है।