'मुक्तिदूत' खंडकाव्य कवि नरेश मेहता द्वारा रचित एक प्रसिद्ध काव्य रचना है। इस खंडकाव्य में कवि ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को "मुक्तिदूत" के रूप में चित्रित किया है।
काव्य की कथा गांधीजी के जीवन, उनके आदर्शों, और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर केंद्रित है। कवि ने गांधीजी को मानवता के संदेशवाहक के रूप में प्रस्तुत किया है, जिन्होंने सत्य, अहिंसा और प्रेम के बल पर भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया।
इस रचना में गांधीजी का दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटना, सत्याग्रह और असहयोग आंदोलनों का संचालन, तथा भारतीय समाज में नई चेतना का संचार दर्शाया गया है। अंत में कवि गांधीजी को विश्व मानवता का मुक्तिदूत बताते हैं, जिन्होंने भारत को ही नहीं, समस्त विश्व को स्वतंत्रता और शांति का संदेश दिया।
संक्षेप में:
'मुक्तिदूत' गांधीजी के त्याग, तप, सत्य और अहिंसा पर आधारित काव्य है, जो उन्हें मानवता का मार्गदर्शक और विश्वशांति का प्रतीक दर्शाता है।