Question:

'मुक्ति-दूत' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग का कथासार लिखिए । 
 

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इस सर्ग का कथासार लिखते समय, दक्षिण अफ्रीका की रेलगाड़ी वाली घटना का उल्लेख अवश्य करें क्योंकि यही घटना गाँधीजी के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी और यहीं से सत्याग्रह का बीजारोपण हुआ।
Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

डॉ. राजेन्द्र मिश्र द्वारा रचित 'मुक्ति-दूत' खण्डकाव्य का द्वितीय सर्ग महात्मा गाँधी के दक्षिण अफ्रीका के प्रवास और वहाँ उनके सत्याग्रह के जन्म की घटनाओं पर आधारित है। इसका कथासार इस प्रकार है:
कवि वर्णन करता है कि किस प्रकार दक्षिण अफ्रीका में बसे भारतीयों पर गोरे शासक अत्याचार करते थे। उनका जीवन अत्यंत अपमानजनक और कष्टपूर्ण था।
गाँधीजी एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाते हैं। वहाँ उन्हें भी रंगभेद की नीति का कटु अनुभव होता है। प्रिटोरिया जाते समय उन्हें प्रथम श्रेणी के डिब्बे से सामान सहित बाहर फेंक दिया जाता है।
इस घटना से गाँधीजी के मन में गहरा आघात लगता है और वे वहाँ बसे भारतीयों को उनके अधिकार दिलाने का दृढ़ संकल्प लेते हैं।
वे भारतीयों को संगठित करते हैं और 'सत्याग्रह' के माध्यम से रंगभेद की नीति का विरोध करने का आह्वान करते हैं।
वे अहिंसक आंदोलन चलाते हैं, जिसके कारण उन्हें अनेक बार जेल भी जाना पड़ता है। किन्तु वे अपने पथ से विचलित नहीं होते।
उनके प्रयासों के फलस्वरूप अंततः दक्षिण अफ्रीका की सरकार को झुकना पड़ता है और भारतीयों के विरुद्ध बनाए गए भेदभावपूर्ण कानूनों को रद्द करना पड़ता है। यह उनकी पहली महान विजय थी, जिसने सत्याग्रह रूपी अस्त्र की शक्ति को सिद्ध कर दिया।
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