'मेवाड़-मुकुट' खंडकाव्य के नायक महाराणा प्रताप हैं। वे भारत के इतिहास के महान स्वतंत्रता सेनानी और वीर पुरुषों में से एक थे। कवि ने उन्हें पराक्रम, देशभक्ति और स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में चित्रित किया है।
1. अपराजेय योद्धा: राणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए जंगलों में रहना स्वीकार किया, पर दासता नहीं।
2. स्वाभिमानी और देशभक्त: उन्होंने अपने राज्य और सम्मान की रक्षा के लिए अपार कष्ट सहे। उनके लिए "स्वराज्य" सर्वोच्च था।
3. त्यागमय जीवन: प्रताप ने अपने परिवार, सुख-सुविधाओं और राजवैभव का त्याग कर मातृभूमि की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया।
4. न्यायप्रिय और करुणामय: वे अपने प्रजाजन से अत्यंत प्रेम करते थे। उनकी नीति न्याय और समानता पर आधारित थी।
निष्कर्ष:
महाराणा प्रताप का चरित्र पराक्रम, देशभक्ति और आत्मसम्मान की मिसाल है। कवि ने उन्हें "मेवाड़ का मुकुट" और "भारत की स्वतंत्रता का प्रहरी" कहा है।