'मेवाड़ मुकुट' खंडकाव्य के आधार पर भामाशाह का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Step 1: परिचय.
भामाशाह मेवाड़ के महान व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे केवल एक व्यापारी या मंत्री ही नहीं थे, बल्कि राष्ट्रप्रेम और त्याग की मूर्ति थे। कवि ने उन्हें "मेवाड़ मुकुट" खंडकाव्य में महाराणा प्रताप के सच्चे सहयोगी के रूप में प्रस्तुत किया है।
Step 2: त्याग और उदारता.
हल्दीघाटी के युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप आर्थिक रूप से दुर्बल हो गए और राज्य संचालन के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं थी, तब भामाशाह ने अपना संपूर्ण धन प्रताप के चरणों में अर्पित कर दिया। उनका यह योगदान केवल आर्थिक सहायता नहीं था, बल्कि यह उनके निःस्वार्थ राष्ट्रप्रेम और त्याग की भावना का प्रतीक था।
Step 3: राष्ट्र के प्रति निष्ठा.
भामाशाह ने अपनी सम्पत्ति को व्यक्तिगत भोग या विलासिता के लिए कभी सुरक्षित नहीं रखा। उन्होंने यह समझा कि मातृभूमि की रक्षा व्यक्तिगत सुख से कहीं बड़ी है। इसीलिए उन्होंने एक सच्चे देशभक्त की तरह अपनी सारी संपत्ति स्वतंत्रता-संग्राम के लिए समर्पित कर दी।
Step 4: मित्रता और सहयोग.
वे महाराणा प्रताप के परम मित्र थे। उन्होंने कठिन से कठिन समय में भी प्रताप का साथ नहीं छोड़ा। उनका सहयोग प्रताप को पुनः संगठित होकर मुग़लों के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देता रहा। इस प्रकार भामाशाह केवल दानवीर ही नहीं, बल्कि संघर्ष के साथी और मार्गदर्शक भी थे।
Step 5: निष्कर्ष.
भामाशाह का चरित्र उदारता, त्याग, निःस्वार्थता और मातृभूमि-निष्ठा से ओतप्रोत है। वे भारतीय इतिहास में उन अमर व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरी माना।
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