Question:

खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर क्या सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ कहा जा सकता है? पक्ष या विपक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।

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ऐसे प्रश्न में पक्ष और विपक्ष दोनों को तर्क सहित जोड़ें तो उत्तर संतुलित और प्रभावी बनता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ कहा जा सकता है — इस पक्ष में मजबूत तर्क हैं।
खुदाई में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कालीबंगा जैसे स्थलों पर विशाल स्नानागार, कुएँ, जल संग्रहण कुंड, जल निकासी नालियाँ और घरों में पानी की आपूर्ति के प्रमाण मिले हैं।
सिंचाई के लिए नदियों का उपयोग, खेतों की सींचाई और जल संरक्षण की तकनीकें सिंधु सभ्यता को विकसित बनाती थीं।
सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसी बस्तियाँ जल पर निर्भर थीं — नदियों के बदलते प्रवाह ने ही इस सभ्यता के उत्थान-पतन में भूमिका निभाई।
विपक्ष में यह कहा जा सकता है कि केवल जल संरचनाएँ ही पूरी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ नहीं बना देतीं — अन्य कारक जैसे कृषि, व्यापार, नगर नियोजन, धर्म भी उतने ही महत्वपूर्ण थे।
फिर भी पुरातात्त्विक प्रमाणों से यह स्पष्ट है कि जल प्रबंधन इस सभ्यता की पहचान थी — अतः इसे जल-संस्कृति कहना तर्कसंगत है।
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