कर्ण का चरित्र-चित्रण:
'कर्ण खण्डकाव्य' के नायक कर्ण महाभारत के एक महान, वीर और दानशील पात्र हैं। वे सूर्यपुत्र थे परंतु सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें सारथी अधिरथ और राधा ने पाला। कर्ण जन्म से ही दिव्य कवच और कुंडल धारण किए हुए थे। वे महान धनुर्धर और युद्धकौशल में अर्जुन के समकक्ष थे।
कर्ण का जीवन त्याग, साहस और दानशीलता का प्रतीक है। वे 'दानवीर कर्ण' के नाम से प्रसिद्ध हैं क्योंकि वे कभी भी किसी याचक को निराश नहीं करते थे। द्रौपदी स्वयंवर में सूतपुत्र कहकर उनका अपमान हुआ, परंतु उन्होंने धैर्य रखा। वे दुर्योधन के परममित्र बने और कौरवों की ओर से युद्ध लड़े।
उनके चरित्र में मित्रता, निष्ठा और आत्मसम्मान प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। वे न्यायप्रिय थे और हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहते थे, किंतु दुर्योधन की मित्रता ने उन्हें पांडवों के विरोध में खड़ा कर दिया। कर्ण भारतीय साहित्य में वीरता और दानशीलता के आदर्श के रूप में अमर हैं।