Question:

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के 'द्वितीय सर्ग' की कथा संक्षेप में लिखिए।

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सर्ग आधारित प्रश्नों में कथा को बिंदुवार और भावानुकूल रूप में लिखना चाहिए ताकि उत्तर साहित्यिक लगे।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य का द्वितीय सर्ग अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक है। इसमें भरत के चरित्र की गंभीरता और आदर्शवादिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
1. इस सर्ग में वर्णन है कि भरत जब राम के वनवास का समाचार पाते हैं, तो वे अत्यंत दुखी हो जाते हैं।
2. वे अपनी माता कैकेयी को उसके कर्म के लिए कठोर शब्दों में धिक्कारते हैं और अपने को दोषी मानते हैं।
3. भरत निश्चय करते हैं कि वे अयोध्या का राज्य स्वीकार नहीं करेंगे और राम को वापस लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
4. कवि ने इस सर्ग में भरत की विनम्रता, भ्रातृभक्ति और त्याग की भावना का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है।
यह सर्ग भरत के आदर्शवादी और कर्मठ व्यक्तित्व का उत्कृष्ट परिचायक है।
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