Question:

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के 'चतुर्थ सर्ग' की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए।

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कथावस्तु आधारित प्रश्नों में घटनाओं को क्रमबद्ध और संक्षिप्त रूप में लिखना चाहिए ताकि उत्तर सुगठित लगे।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य का चतुर्थ सर्ग अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक है। इसमें भरत का राम के प्रति अटूट प्रेम और त्याग की भावना प्रमुख रूप से प्रकट होती है।
1. इस सर्ग में वर्णन है कि भरत अयोध्या से वन में राम के पास जाते हैं और उनसे राज्य ग्रहण करने का आग्रह करते हैं।
2. भरत बार-बार राम से निवेदन करते हैं कि अयोध्या की प्रजा राजा के बिना दुखी है और उन्हें ही राज्य स्वीकार करना चाहिए।
3. किन्तु राम अपने वचन और धर्म का पालन करते हुए राज्य स्वीकार नहीं करते।
4. अंततः भरत राम की खड़ाऊँ को अयोध्या ले जाते हैं और उन्हें ही राज्य की सत्ता का प्रतीक मानकर स्वयं सेवक की भाँति कार्यभार संभालते हैं।
यह सर्ग भ्रातृ-प्रेम, त्याग, कर्तव्य और आदर्श मर्यादाओं की गहन अनुभूति कराता है।
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