'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य में जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रेरणादायक रूप में चित्रित किया गया है। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उनका जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक था।
नेहरू का जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ, किन्तु उन्होंने विलासिता का जीवन त्यागकर राष्ट्रसेवा को अपनाया। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे भारत लौटे और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। उनका व्यक्तित्व विद्वता, करुणा और मानवता से परिपूर्ण था।
वे बच्चों से अत्यधिक स्नेह रखते थे, इसलिए उन्हें 'चाचा नेहरू' कहा जाता है। उन्होंने भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, औद्योगिक विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने का कार्य किया। वे गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापकों में से एक और विश्व शांति के प्रबल समर्थक थे।
इस प्रकार जवाहरलाल नेहरू का चरित्र उदारता, दूरदर्शिता, मानवता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। कवि ने उन्हें राष्ट्र की ज्योति कहकर सम्मानित किया है।