'जय सुभाष' खंडकाव्य के तृतीय सर्ग का कथानक संक्षेप में लिखिए।
Step 1: परिचय.
'जय सुभाष' खंडकाव्य का तृतीय सर्ग नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के संघर्षमय जीवन और उनके राष्ट्रप्रेम की गाथा का भावपूर्ण चित्रण है। इसमें उनकी आज़ादी के लिए किए गए प्रयासों और बलिदानों का विवरण मिलता है।
Step 2: कथावस्तु का वर्णन.
इस सर्ग में वर्णन है कि सुभाषचन्द्र बोस ने किस प्रकार युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने "आजाद हिन्द फौज" की स्थापना कर भारतीयों में आत्मविश्वास और साहस का संचार किया। सर्ग में उनके साहसिक नारों और भाषणों का भी वर्णन है, जिनसे जनता में जोश और देशभक्ति की भावना जाग्रत हुई।
साथ ही, कवि ने यह भी दिखाया है कि नेताजी ने अपने निजी जीवन और सुख का त्याग कर मातृभूमि की सेवा को ही अपना जीवन ध्येय बनाया। उनका नेतृत्व और दृढ़ संकल्प स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देता है।
Step 3: निष्कर्ष.
तृतीय सर्ग की कथावस्तु नेताजी सुभाष के संघर्ष, त्याग और नेतृत्व का परिचायक है। इसमें कवि ने यह संदेश दिया है कि सच्चा राष्ट्रनायक वही है जो अपने प्राणों की आहुति देकर भी मातृभूमि की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
'आलोक - वृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर 'असहयोग आन्दोलन' की घटना का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
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'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की नायिका का चरित्र चित्रण कीजिए।
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की विशेषताएँ उद्घाटित कीजिए।
'त्यागपथी' खण्डकाव्य की प्रमुख घटना का उल्लेख कीजिए।