Question:

हफ़्ते में दो-दो बार सिनेमा देखने वाले, ग़ज़ल और फ़िल्मी गाने गुनगुनाने वाले यशोधर पंत ने बुढ़ापा क्यों ओढ़ लिया था? ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी के आधार पर लिखिए। क्या आप उनकी सोच से सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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किसी पात्र की सोच का मूल्यांकन करते समय, कहानी की घटनाओं को जीवन-दर्शन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यशोधर पंत एक ऐसे पात्र हैं जो सामाजिक प्रतिष्ठा और जिम्मेदारियों के दबाव में अपने व्यक्तिगत शौकों को दबाकर जीवन के एक खास ढर्रे को अपनाते हैं। उन्होंने बुढ़ापा इसलिए “ओढ़” लिया क्योंकि उन्हें लगा कि अब सामाजिक सम्मान और मर्यादा बनाए रखने के लिए परिपक्व, संयमित और गंभीर जीवन जीना चाहिए।
हालाँकि वे अंदर से अब भी फिल्मों, ग़ज़लों और संगीत में रुचि रखने वाले व्यक्ति थे, लेकिन समाज के अनुसार वे अब “बूढ़े” हो चुके थे और उन्हें ऐसा आचरण करना चाहिए जो “प्रौढ़ता” का संकेत देता हो।
इस सोच से आंशिक सहमति हो सकती है कि व्यक्ति सामाजिक भूमिका निभाते हुए कुछ बदलाव करता है, लेकिन यह ठीक नहीं कि वह स्वयं के मूल स्वभाव को दबा दे। मनुष्य का आत्म-सुख भी महत्वपूर्ण होता है और समाज को यह स्वीकारना चाहिए कि उम्र चाहे कोई भी हो, रुचियाँ मानवीय स्वतंत्रता का अंग हैं।
इसलिए, यशोधर पंत की सोच सामाजिक दबाव की उपज है, लेकिन उससे मुक्त होकर वे एक अधिक मुक्त और पूर्ण जीवन जी सकते थे।
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