गाथांशं पठित्वा निर्दिश्तम्: कुतः? कथम्? (5 तः 4)
यथा चतुर्भिः कणकं परीक्ष्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते श्रुतेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥
अयं न भक्तो न च पूजको वा
घण्टां स्वयं नादयते तथापि।
धनं जनेभ्यः किल याति दोषम्
न याचको वा न च निर्धनो वा॥
वाल्मीकीयव्याख्यानानाम् प्राचीनाः कविपण्डिताः।
तान् शिक्षयन्ति सततं ये सदा वाचने रताः॥
घटं भिन्ध्यात् पटं छिन्द्यात् कुशधारं भिन्ध्यात्।
येन केन प्रकारेण प्रसिद्धः पुरुषो भवेत्॥
\[\begin{array}{|c|c|} \hline \textbf{विशेषणम्} & \textbf{विशेष्यम्} \\ \hline \text{(1) प्राचीनः} & \text{पुरुषः} \\ \hline \text{(2) प्रसिद्धः} & \text{कविपण्डिताः, घटम्} \\ \hline \end{array}\]
जालरेखाचित्रं पूरयत। 
न \(\underline{भक्तः}\)
न पूजकः
लोकयानवाहकः
न निर्धनः
न \(\underline{याचकः}\)
पद्यांशात् 2 द्वितीयाविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत।
पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत।
‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर गाँव की प्रकृति का गर्मी, सर्दी और वर्षा ऋतुओं के अनुभव वर्णन कीजिए। वहाँ के लोग गर्मी ऋतु के प्रकोप से बचने के लिए क्या उपाय करते थे?
‘अपना मालवा खाऊँ–उजाऊ सभ्यता में.....’ पाठ में विक्रमादित्य, भोज और मुँज आदि राजाओं का उल्लेख किस संदर्भ में आया है? स्पष्ट कीजिए।
‘तोड़ो’ कविता का कवि क्या तोड़ने की बात करता है और क्यों?
“इसी तरह भरता और खाली होता है यह शहर” पंक्ति के संदर्भ में बनारस शहर के ‘भरने’ और ‘खाली’ होने से क्या अभिप्राय है?
“मैंने निज दुर्बल पद-बल, उससे हारी होड़ लगाई” ‘देवसेना का गीत’ से उद्धृत इस पंक्ति से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
विषय: कल्पेश/कल्पना पाटेकर... अपनी गलत जन्मतिथि को सुधार करने हेतु प्रधानाचार्य... को पत्र लिखता/लिखती है।
निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(i) मुँह लाल होना
(ii) टाँग अड़ाना
अथवा
अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए कोष्ठक में दिए मुहावरों में से उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए :
(तिलमिला जाना, काँप उठना)
पंडित बुद्धिराम काकी को देखते ही \underline{क्रोध में आ गए}।