‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के आधार पर लिखिए कि टी.वी. पर शारीरिक पीड़ा झेलने वाले व्यक्ति से जुड़ा साक्षात्कार क्या सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम कहा जा सकता है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कवि ने आधुनिक मीडिया की संवेदनहीनता को उजागर किया है। टी.वी. कार्यक्रम में पीड़ित व्यक्ति का साक्षात्कार करना अगर केवल दर्शकों को भावुक करने या टीआरपी बढ़ाने के लिए हो, तो यह सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता।
यदि यह कार्यक्रम अपाहिजों के अधिकार, उनके संघर्ष, या उनके लिए समाज की जिम्मेदारियों को सामने लाने का माध्यम बने, तभी यह सामाजिक उद्देश्य से युक्त माना जा सकता है।
अतः ऐसे कार्यक्रम का मूल्यांकन उसके उद्देश्य, प्रस्तुति और प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए न कि केवल दृश्य प्रभाव के आधार पर।
‘बाज़ार में कभी–कभी आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ — इस कथन को उदाहरण सहित ‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
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'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत — इस विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
यशोधर बाबू की पत्नी मुख्यतः पुराने संस्कारों वाली थी, फिर किन कारणों से वह आधुनिक बन गई ? उसके इस आचरण पर यशोधर बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी ?
