Question:

भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल कार्य क्यों है? 
 

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लेखन केवल शब्दों का प्रयोग नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई और स्पष्ट विचारों की प्रस्तुति का संयोजन है।
Updated On: Jul 30, 2025
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Solution and Explanation

भावनाएँ और विचार हमारे मन के सूक्ष्म अनुभव होते हैं, जिन्हें केवल महसूस किया जा सकता है। जब इन अमूर्त अनुभूतियों को शब्दों का रूप देना होता है, तो अधिकांश लोगों को कठिनाई होती है क्योंकि यह केवल भाषा का कार्य नहीं, संवेदनशीलता, अभिव्यक्ति-कौशल और आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया है।
बहुत से लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन उन्हें उचित शब्दों में पिरो नहीं पाते। कभी शब्दों की कमी होती है, तो कभी शब्दों में भावना का वजन नहीं उतर पाता। साथ ही, लेखन में तार्किक क्रम, स्पष्ट उद्देश्य और रचनात्मक संरचना का होना आवश्यक है, जो अभ्यास और गहन अध्ययन से ही आता है।
इसके अतिरिक्त, भावों को व्यक्त करते समय आत्म-संकोच, आत्म-संशय और सामाजिक मूल्यांकन का डर भी रुकावट बन जाता है। इसलिए भावनाओं और विचारों को लेख का रूप देना एक गहन और जटिल प्रक्रिया है, जो लेखन-कला और आत्मबोध दोनों की माँग करती है।
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