Question:

‘बारहमासा’ के आधार पर जायसी के काव्य-सौंदर्य पर एक टिप्पणी लिखिए। 
 

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‘बारहमासा’ विधा में ऋतु-चक्र और मन-चक्र का अद्भुत मेल जायसी की काव्य-प्रतिभा को दर्शाता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘बारहमासा’ हिंदी साहित्य की लोकप्रवृत्ति से जुड़ी एक विधा है, जिसमें बारह महीनों के माध्यम से ऋतु, प्रकृति और प्रेम की स्थितियाँ दर्शाई जाती हैं। मलिक मोहम्मद जायसी ने अपने महाकाव्य ‘पद्मावत’ में बारहमासा के माध्यम से विरहिणी नायिका की पीड़ा को अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से चित्रित किया है।
जायसी का काव्य-सौंदर्य चार प्रमुख स्तरों पर उभरता है:
(i) प्रकृति-चित्रण: हर महीने का ऋतु-अनुरूप वर्णन, जैसे फागुन की मस्ती, जेठ की तपिश, सावन की बरखा — सब कुछ प्रेम के भावों से जुड़ा हुआ है।
(ii) भाव-प्रवणता: नायिका की पीड़ा, प्रतीक्षा और एकाकीपन अत्यंत मार्मिक हैं — पाठक नायिका के दुःख में शामिल हो जाता है।
(iii) प्रतीकों का प्रयोग: ऋतुओं के माध्यम से नायिका के मन की दशा का संकेत — यह सूक्ष्म सौंदर्य है।
(iv) लोकबोध और सरलता: भाषा सहज, भाव प्रवाहपूर्ण है — जिसमें लोकगीतों की तरह स्वाभाविकता है।
इस प्रकार ‘बारहमासा’ जायसी के काव्य में संवेदना, कल्पना और सौंदर्य का विलक्षण संगम प्रस्तुत करता है।
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