Question:

'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए । 
 

Show Hint

श्रीकृष्ण जैसे बहुआयामी चरित्र का चित्रण करते समय, उनके विभिन्न रूपों (जैसे- मानवीय, दैवीय, राजनीतिक) का उल्लेख करें। प्रत्येक विशेषता के समर्थन में खण्डकाव्य से उदाहरण देना उत्तर को प्रमाणित करता है।
Updated On: Nov 10, 2025
Hide Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

पं. रामबहोरी शुक्ल द्वारा रचित 'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के नायक भगवान श्रीकृष्ण हैं। वे इस खण्डकाव्य के प्राण हैं। उनकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
धर्म-संस्थापक और लोक-रक्षक: श्रीकृष्ण धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए ही अवतरित हुए हैं। वे दुष्टों का संहार करके सज्जनों की रक्षा करते हैं। शिशुपाल का वध उनके इसी चरित्र को दर्शाता है।
शिष्ट और विनयशील: अपार शक्ति और ऐश्वर्य के स्वामी होते हुए भी श्रीकृष्ण अत्यंत शिष्ट और विनयशील हैं। वे युधिष्ठिर के यज्ञ में ब्राह्मणों के चरण धोने और जूठी पत्तलें उठाने का कार्य भी सहजता से करते हैं।
अपार शक्ति के स्वामी: वे अलौकिक शक्ति से सम्पन्न हैं। उनके विराट रूप और सुदर्शन चक्र के तेज से सभी परिचित हैं। उन्होंने अपनी शक्ति से शिशुपाल का वध कर सभा को भयमुक्त किया।
उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ एवं कूटनीतिज्ञ: श्रीकृष्ण एक महान राजनीतिज्ञ हैं। वे युधिष्ठिर को राजसूय यज्ञ करने की प्रेरणा देते हैं ताकि सभी राजा उनकी अधीनता स्वीकार करें और एक अखण्ड भारत का निर्माण हो सके।
निर्लिप्त कर्मयोगी: वे कर्म में विश्वास रखते हैं और फल की इच्छा नहीं करते। वे स्वयं यज्ञ में निस्स्वार्थ भाव से सेवा कार्य करते हैं, जो उनके कर्मयोगी स्वरूप को प्रकट करता है।
Was this answer helpful?
0
0