Question:

'अग्निपूजा' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।

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चरित्र-चित्रण में नायक के गुण, उसके आचरण, विचार और समाज पर प्रभाव अवश्य जोड़ें ताकि उत्तर संतुलित लगे।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

'अग्निपूजा' खण्डकाव्य का नायक युधिष्ठिर है, जो धर्म, सत्य और संयम का प्रतीक है। कवि ने उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष का चित्रण किया है।
1. धर्मनिष्ठ: युधिष्ठिर सदैव धर्म के मार्ग पर चलते हैं। वे हर कार्य को धर्मसंगत दृष्टि से देखते हैं। उनके लिए नैतिकता सर्वोपरि है।
2. सत्यप्रिय: युधिष्ठिर कभी असत्य का सहारा नहीं लेते। वे मानते हैं कि सत्य ही ईश्वर है और उसी के पालन में जीवन का कल्याण है।
3. त्यागी और संयमी: वे भोग और विलासिता से दूर रहते हैं। उनके जीवन में तप, संयम और त्याग का अद्भुत संतुलन है।
4. आदर्श शासक और पथप्रदर्शक: युधिष्ठिर ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो नीति, न्याय और धर्म के आधार पर चलता है। उन्होंने अपने राज्य में समरसता और न्याय की स्थापना की।
5. निष्कर्ष: युधिष्ठिर का चरित्र मानवता, सत्य और धर्म का मूर्त रूप है। वे भारतीय जीवन-दर्शन के उस आदर्श का प्रतीक हैं, जिसमें कर्म, संयम और करुणा तीनों का समन्वय है।
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