'अग्निपूजा' खण्डकाव्य का 'आयोजन सर्ग' अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक है। इसमें धर्म, कर्तव्य और आत्मबल की भावना का वर्णन किया गया है।
1. मुख्य प्रसंग: इस सर्ग में अग्निपूजा के आयोजन का वर्णन है। युधिष्ठिर और अन्य पांडव अपने समस्त कर्तव्यों का पालन करते हुए धर्मयज्ञ का आयोजन करते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में एकता, शांति और सत्य की स्थापना करना है।
2. सामाजिक संदेश: आयोजन सर्ग में यह दिखाया गया है कि यज्ञ केवल देवताओं की पूजा का साधन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और लोककल्याण का माध्यम है। इसमें परिश्रम, संयम और त्याग का संदेश निहित है।
3. भावनात्मक पक्ष: कवि ने इस सर्ग में अग्नि को शुद्धता, तेज और पवित्रता का प्रतीक माना है। अग्निपूजा के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की अशुद्धियों को जलाकर सच्चाई और धर्म की ओर अग्रसर होता है।
4. निष्कर्ष: 'आयोजन सर्ग' में कवि ने यह स्पष्ट किया है कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयत्न है। अग्नि यहाँ आत्मबल और नैतिक शक्ति का प्रतीक है।