'अग्निपूजा' खण्डकाव्य का नायक कौन है? उनका चरित्र-चित्रण कीजिए।
'अग्निपूजा' खण्डकाव्य का नायक अर्जुन है। कवि ने अर्जुन के चरित्र को केवल युद्ध-कुशल योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया है।
1. पराक्रमी योद्धा:
अर्जुन महाभारत के प्रमुख धनुर्धर और पराक्रमी योद्धा थे। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य से अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की और अपने परिश्रम और समर्पण से उन्हें पूर्णता तक पहुँचाया। अर्जुन का गाण्डीव और उनकी अपराजेय युद्ध-कला उन्हें सभी से विशिष्ट बनाती है।
2. धर्मनिष्ठ और आदर्शवादी:
अर्जुन केवल शस्त्रबल से ही महान नहीं थे, बल्कि वे धर्म और नीति के भी समर्थक थे। युद्धभूमि में भी उन्होंने सदैव धर्म के पक्ष को अपनाया। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश देकर अपने संदेश का पात्र बनाया।
3. कृष्ण-भक्ति और मित्रता:
अर्जुन का सबसे बड़ा गुण था – उनका श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास। वे कृष्ण को केवल मित्र ही नहीं, बल्कि अपने मार्गदर्शक और सारथी के रूप में मानते थे। यह भक्ति और समर्पण उनके चरित्र को और भी ऊँचाई प्रदान करता है।
4. द्रौपदी के रक्षक और भाई-बंधुओं के प्रिय:
अर्जुन ने द्रौपदी स्वयंवर में विजय प्राप्त की और वे सदैव द्रौपदी और अपने भाइयों की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। उनका स्वभाव दयालु, कर्तव्यनिष्ठ और परिवार-प्रेमी था। निष्कर्ष:
अर्जुन का चरित्र पराक्रम, धर्म, नीति और भक्ति का सुंदर संगम है। वे केवल पाण्डवों के बल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के शौर्य और आदर्श के अमर प्रतीक भी हैं।
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