Comprehension

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए —

सिमटा पंख साँझ की लालि
जा बैठी अब तक शाखों पर
ताम्रपर्ण पीपल से, श्याममुख
झरते चंचल स्वर्णिम निर्झर !

ज्योति रश्मि-सा धंध सरिता में
सूर्य निमित्त हुए होता ओझल,
बुद्धि बिन्धा विश्रान्त केतकी-सा
लगता वितस्क्रमा गंगाजल !

धूपछाँह के रंग की रति
अमित ज्योतिर्मयी से संपृक्त
नील लहरियों में लोचित
पीला जल जल जलद से विभक्त !

सिक्तता, सशिल, समीप स्रता से
स्नेह पाश में बंधे सुमृदुज्वल,
अमित पिपासित सशिल, सशिल
ज्यों गति त्रव खो बन गया लवोचल

शंख घंट उपने मंथन में
लयों में होता एक संगम,
दीप शिखा-सा उद्गार कल्पना
नभ में उठकर करता नीराजन !

Question: 1

कविता का मुख्य स्वर कौन-सा रहा है ? 
 

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कविता केवल सौंदर्य या कल्पना नहीं, यथार्थ और समाज की पीड़ा का भी स्वर बन सकती है — यह कविता उसका उदाहरण है।
Updated On: Jan 14, 2026
  • नई कविता परंपरा
  • श्रमजीवी वर्ग की पीड़ा
  • युद्ध की विभीषिका
  • प्रकृति सौंदर्य का चित्रण
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

प्रस्तुत कविता में श्रमजीवी वर्ग की कठिन परिस्थितियों, संघर्ष, उपेक्षा और कष्टों का गहन चित्रण किया गया है।
कविता की आरंभिक पंक्तियों से ही स्पष्ट है कि यह कविता उन मजदूरों की व्यथा को स्वर देती है जो जीवनभर मेहनत करते हैं, फिर भी उन्हें समाज से उचित मान-सम्मान या अधिकार नहीं मिलता।
पंक्तियाँ जैसे —
‘‘श्रमिक सन्तति का रक्त-स्वेद-सींचन,
नूतन निर्माण चिह्न-सा अंकित’’

इनमें श्रमिकों के श्रम और बलिदान का उल्लेख किया गया है। यह कविता उनके संघर्ष, अभाव, और श्रम को केंद्र में रखती है, जिससे श्रमजीवी वर्ग के प्रति सहानुभूति उत्पन्न होती है।
युद्ध, प्रकृति, या केवल सौंदर्य का चित्रण इसमें गौण है — मूल स्वर है श्रमिक वर्ग की सामाजिक स्थिति को उजागर करना और उनके योगदान को रेखांकित करना।
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Question: 2

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए:

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कविता में प्रयुक्त उपमानों को समझने के लिए उनके सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक अर्थों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
  • 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
  • 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • 1-(i), 2-(iii), 3-(i)
  • 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

इस प्रश्न में तीन उपमानों को उनके उपमेयों से जोड़ने का कार्य किया गया है। प्रत्येक उपमान कविता में किसी प्रतीक के माध्यम से किसी वस्तु विशेष की ओर संकेत करता है।
1. ज्योति-स्तंभ — सूर्य (iii): यह प्रतीक सूर्य का बिंब प्रस्तुत करता है, जो प्रकाश का सर्वोच्च स्रोत है। कविता में ‘ज्योति-स्तंभ’ का अर्थ है वह शक्ति जो सबको प्रकाशित करती है।
2. कैचुल-सा — गंगाजल (ii): ‘कैचुल’ का अर्थ है साँप की केंचुली, जिसे वह त्याग देता है। यह यहाँ परिवर्तन, शुद्धि और आत्मशुद्धि का प्रतीक है — जो गंगाजल के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
3. दीपशिखा — कलश (i): ‘दीपशिखा’ का संबंध अग्नि और पवित्रता से है। ‘कलश’ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों में पवित्रता का प्रतीक होता है। अतः इन दोनों के बीच गहरा सांस्कृतिक संबंध है।
इस प्रकार, विकल्प (A) सबसे उपयुक्त है जिसमें सभी जोड़ सही तरीके से मेल खाते हैं।
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Question: 3

स्नेह रूपी बंधन में कौन-कौन बँधे हैं ?

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प्राकृतिक तत्वों का संबंध केवल भौतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीकों और भावनात्मक अभिव्यक्तियों से भी जुड़ा होता है। इन्हें समझना कविता की गहराई को उजागर करता है।
Updated On: Jan 14, 2026
  • लहर, जलधार, रेत
  • लहर, रेत, अग्नि
  • हवा, रेत, पानी
  • हवा, लहर, अग्नि
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

इस प्रश्न का उत्तर गद्यांश की उस पंक्ति में छिपा है जहाँ कहा गया है – “हवा, रेत, पानी” स्नेह के सूत्र में बंधे हुए हैं। इस पंक्ति का आशय यह है कि हवा, रेत और पानी जैसी प्राकृतिक शक्तियाँ भी एक-दूसरे से स्नेह-बंधन में बंधी हुई प्रतीत होती हैं। यह प्रतीकात्मक भाषा बताती है कि ये तीनों तत्व मिलकर जीवन के संतुलन और सौंदर्य को बनाए रखते हैं।
यह बंधन केवल भौतिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक स्तर पर भी परिलक्षित होता है — जैसे रेत पर चलती हवा, हवा से उठती तरंगे और पानी का जीवनदायिनी प्रवाह, सभी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।
इस आधार पर विकल्प (C) "हवा, रेत, पानी" इस प्रश्न का सही उत्तर है।
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Question: 4

संध्या के समय गंगा नदी कैसी प्रतीत हो रही है ?

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कविता में संध्या समय की गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक जीवंत और दिव्य अनुभूति का अनुभव कराती है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

संध्या के समय गंगा नदी अत्यंत शांत, पावन और मनोहारी प्रतीत होती है। सूर्यास्त की लालिमा जब गंगा के जल पर पड़ती है, तो वह केतकी-सिंदूर-सा रंग धारण कर लेती है। कविता में इसे सूर्य के समान प्रकाशमान बताया गया है।
गंगा की यह छवि एक दिव्य प्रकाश की अनुभूति कराती है। यह दृश्य केवल प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावनाओं को भी उजागर करता है। गंगा का यह रूप जीवन के सौंदर्य और उसकी शांति का प्रतीक बन जाता है।
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Question: 5

संध्याकालीन प्रकृति की सुंदरता का वर्णन कीजिए।

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संध्या का समय केवल दिन का अंत नहीं, बल्कि प्रकृति की आत्मा से जुड़ने का सुनहरा अवसर है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

संध्याकाल में प्रकृति अपनी संपूर्ण छटा बिखेर देती है। सूर्य की लालिमा, नीला आकाश, मंद बहती हवा और शांत वातावरण — यह सब मिलकर एक अनुपम दृश्य रचते हैं। पक्षी लौटते हुए कलरव करते हैं, मंदिरों की घंटियाँ गूंजती हैं और वातावरण में भक्ति का संचार होता है।
कविता में यह स्पष्ट होता है कि यह समय मनुष्य के मन को भी शांत करता है। प्रकृति इस समय एक चित्रकार की तरह रंगों और ध्वनियों से वातावरण को सजाती है। यह सौंदर्य मानव को आत्मीयता और आध्यात्मिकता का अनुभव कराता है।
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Question: 6

संध्या के नदी तट के दृश्य का वर्णन कीजिए। 
 

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नदी तट का संध्या समय भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

संध्या के समय नदी तट का दृश्य अत्यंत रमणीय और भक्तिपूर्ण होता है। गंगा के तट पर दीपकों की पंक्तियाँ जलती हैं, श्रद्धालु आरती करते हैं और गंगा पर सिंदूरी आभा छा जाती है। यह दृश्य अध्यात्म, संस्कृति और प्रकृति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
लहरों की मधुर ध्वनि, फूलों की सुगंध और मंदिरों की आरती — यह सब मिलकर एक दिव्य वातावरण बनाते हैं। कविता में इसे इस रूप में चित्रित किया गया है कि जैसे संध्या समय गंगा स्वयं देवी का रूप धारण कर रही हो।
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